अखिल भारतीय कला उत्सव गाजियाबाद -2013
ने गाजियाबाद को बहुत कुछ दिया है जिसमें लगभग 50 पेंटिंग्स और 12 मूर्तिशिल्प
जिसमें कुछ तो तैयार हो गए हैं और कुछ तैयार होने की प्रक्रिया में हैं
.
पद्मश्री वी राम सुतार, श्री उदय प्रताप सिंह और श्रीमती चित्रा मुद्गल ने इस उत्सव की जैसी अवधारणा की
अपेक्षा की थी, उसे समापन अवसर पर प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने जिस तरह से सराहा और उत्तर प्रदेश
में कला के इन आयामों को बढ़ने की बात की उससे कलाकारों, कलाप्रेमीयों, कलाविद्यार्थियों,विविध
संस्कृतिकर्मियों एवं आयोजकों को जिस तरह का साहस मिला, उससे पूरे कार्यक्रम के संयोजकत्व का
उत्तरदायित्व निर्वहन से आई थकान छू हो गयी है।
श्री संतोष कुमार यादव (संरक्षक-अखिल भारतीय कला उत्सव गाजियाबाद -2013) अध्यक्ष/उपाध्यक्ष -
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद के साथ जिस सपने को बुना था उसे वही यह रूप दे सकते हैं
यह पुनः तय हो गया अन्यथा 'कलाधाम' के उपयोगिता पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया था। सांस्कृतिक उत्थान
के 'कलाधाम' के जिस दूसरे चरण की घोषणा उन्होंने "मूर्तिकला पार्क" के रूप में की है वह निश्चित तौर पर
जिले की शकल सवारने में कामयाबी दिलाएगा।
श्री एस वी एस रंगा राव-जिलाधिकारी ने जिस तरह की रुचि इन कलाओं में ली है, उससे जनपदवासियों में
कलाओं के प्रति बड़ा सन्देश जाएगा .
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिस तरह से व्यवस्था को श्री डी . पी . सिंह विशेष कार्य अधिकारी -
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद ने ली और अपने सहयोगियों को निर्देशित किये उससे
प्राधिकरण की नई कार्यप्रणाली सम्मुख आयी .
तमाम खट्टे मीठे अनुभवों को समेटे उनलोगों ने जिन्हें कला समझ आती हो या न आती हो उनका भी
योगदान रहा और उसी में वह भी जुटे रहे।
मेरे विद्यार्थियों एवं मित्रों ने जिस तरह का सहयोग दिया वह हमेश स्मरणीय रहेगा।
इस बार के कला उत्सव की कई उपलब्धियां रहीं जिनमे प्रमुख रूप से
मिडिया को कई एंगेल से लोगों ने संभाला की उसका रुझान कला के उत्कर्ष पर केन्द्रित होने के बजाय इधर
उधर की चिंताओं को लेकर अधिक/ज्यादा चिंता को उजागर किया।
इस बार के कला उत्सव में देश भर से आये कलाकारों ने जिस तरह से काम किया उससे यह देश के किसी भी कला कार्यशाला को पीछे छोड़ने में कामयाब रहा .
एम् एम् एच कालेज के निकले छात्रों की मौलिक रचनाओं ने लोगों का ध्यान केन्द्रित करने में कामयाबी हासिल की . कार्यशाला का इंतजाम भी चित्रकला के विद्यार्थियों ने बखूबी संभाला .
प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव ने गाजियाबाद को कला के क्षेत्र में अग्रणी होने की उम्मीद जताई .
उत्सव के संरक्षक श्री संतोष कुमार यादव एवं उनके सहयोगियों ने हर मोड़ पर इसे नायब होने की शक्ल दी
कार्यक्रम के संयोजकत्व के नाते इस तरह का एहसास होता रहा, पर सुखद यह है की तमाम साजिशों और बदतमीजियों के बावजूद समारोह की गरिमा प्रभावित नहीं हुयी . पूरा कार्यक्रम कला सृजन की प्रक्रिया को प्राप्त किया .
रचनाधर्मिता की अनुभूति और अलौकिक सत्य का सृजन अनुकृति से नहीं चिंतन मनन और ह्रदय के गर्भ से नि;सृत होता है,एहसास की कमी और मन की उछ्रिन्खलता से अक्सर रचनाएँ जड़वत हो जाती हैं जिस सृजन प्रक्रिया ने इस शहर में पिछले दिनों कई दिनों तक चली, लोगों के मन मोह ली, ये केवल तात्कालिक नहीं हैं बल्कि युगों युगों तक इनका असर रहेगा, जिन मनीषियों ने इस विचार का समर्थन किया है निश्चित तौर पर वह सांस्कृतिक इतिहास रच रहे हैं, उन्हें आने वाली पीढियां नमन करेंगी .
-डॉ.लाल रत्नाकर


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