(जहाँ तक जानकारी है की ये प्रिंसिपल चुने जाने के लिए लाखों रुपये 'घुस' के रूप में दिए ) तब जाकर ये घुसखोर गधे प्रिंसिपल बने . इन घूसखोरों की विदाई से 'भ्रष्टाचार' का एक बड़ा 'खेप' रिजेक्ट हो गया 'न्याय' की जय हो.
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डिग्री कालेजों के 156 प्राचार्यों की सेवा समाप्त
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| Story Update : Tuesday, April 24, 2012 1:34 AM |
हाईकोर्ट ने रद की उच्चतर सेवा आयोग की चयन सूची
संशोधित नियमावली के आधार पर चयन का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने उच्चतर सेवा आयोग की चयन सूची 30 जून 2008, दो जुलाई 2008 और 15 मई 2007 को रद कर दिया है। इस आदेश से प्रदेश के डिग्री कालेजों और पोस्ट ग्रेज्युएट कालेजों में चयनित 156 प्राचार्यों की नियुक्ति भी रद हो गई है। न्यायालय ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि वह अभ्यर्थियों का चयन 1983 के संशोधित रेग्युलेशन 6(2) के अनुसार करे। यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने करूणानिधान उपाध्याय और अन्य दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है।
याचिका के अनुसार आयोग द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 33,34,35,36 और 39 के द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया नियम विरुद्ध है। इसमें आयोग के संशोधित रेग्युलेशन का पालन नहीं किया गया। पीजी कालेजों के प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए कुल 564 लोगों ने आवेदन किया था। बिना किसी जांच के इन सभी को साक्षात्कार के लिए बुला लिया गया। जबकि नियमानुसार एक पद के विपरीत छह या आठ अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए। चयन को आरक्षण के आधार भी चुनौती दी गई। इससे पूर्व अनियमितता की शिकायतों पर शासन ने 12 जून 2008 को इलाहाबाद मंडल के मंडलायुक्त को मामले की जांच सौंप दी। मंडलायुक्त ने आयोग से अनुरोध किया कि जांच लंबित रहने के दौरान नियुक्ति पत्र जारी न किए जाएं। कमिश्नर के आदेश के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर अंतत: हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश करते हुए उनको नियुक्ति देने को कहा था। इस आदेश को भी प्रदेश सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों के इस आश्वासन पर कि वह हाईकोर्ट का निर्देश मानेंगे मामले को पुन: हाईकोर्ट लौटा दिया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले को निर्णीत करते हुए 30 जून और दो जुलाई 2008 तथा 15 मई 07 की चयन सूची रद कर दी है। चयनित अभ्यर्थियों से कहा है कि वह सुप्रीमकोर्ट में किए अपने वादे को याद रखें।
तीन साल बाद फिर बन गए मास्टर जी
इलाहाबाद। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से विज्ञापन 39 के तहत डिग्री और पीजी प्राचार्य के पद पर चुने गए 156 प्राचार्य एक बार फिर से अपने पुराने पद पर भेज दिए गए हैं। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से इन पदों पर चयन पूर्व सपा सरकार के दौरान 2006-2007 में और बसपा सरकार के दौरान जून 2008 में हुआ था। आयोग से चयन के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फरवरी-मार्च 2009 में इन प्राचार्यों ने नियुक्ति पाई। अब तीन साल की नौकरी के बाद इन प्राचार्यो को इनके मूल पद पर भेज दिया गया है। खबर है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रबंधन से तालमेल नहीं रखने वाले कई प्राचार्यों को तत्काल पद मुक्त कर दिया गया।
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