शनिवार, 10 दिसंबर 2011

पद्मश्री श्री राम वी सुतार


अरे! इतने गांधी बनाए हैं मैंने...

Story Update : Saturday, December 10, 2011    8:33 PM
i have made so many Gandhi
देश के किसी भी शहर में अगर गांधी जी की मूर्ति दिखे, तो गौर से उस पर खुदे हुए हस्ताक्षर देखिएगा। 75 प्रतिशत संभावना इस बात की है कि वह हस्ताक्षर मूर्तिकार राम सुतार का हो। राम सुतार ने तमाम महापुरुषों की मूर्तियां बनाई हैं, लेकिन वे कहते हैं कि आज भी सबसे ज्यादा मांग गांधी की ही है।

राम वी. सुतार का नाममूर्ति कला में रुचि रखने वालों के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धूलिया जिले में जन्मे राम सुतार को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। लेकिन उनका मानना है कि वे उस समय अपने को ज्यादा सम्मानित महसूस करते हैं, जब उनकी बनाई मूर्ति को देखकर लोग कहते हैं कि वाह क्या बात है! उन्हें इस बात का भी सुकून है कि उन्होंने अपनी मूर्तियों के जरिए देश विदेश में जगह-जगह गांधी को पहुंचा दिया है। हाल ही में वे लंदन टूर करके लौटे हैं। उनसे एक बातचीतः

हाल में ही आप कलाकारों के एक समूह के साथ लंदन का टूर करके लौटे हैं। क्या वहां के कलाजगत पर भी मंदी का कुछ असर दिख रहा है?
हम नौ आर्टिस्ट थे। हम देश के अलग-अलग प्रांतों से थे। हमने वहां के कला परिदृश्य का जायजा लिया। वहां दो जगह हमारी प्रदर्शनी लगी और एक फाउंड्री में मैंने कास्टिंग भी की। वहां के हालात देखकर लगा कि मंदी का असर वहां के कला जगत पर भी पड़ रहा है।

खबर है कि आप गांधी और आइंस्टाइन की जगुलबंदी पर कोई कंपोजीशन बना रहे हैं?
हां, न्यूजीलैंड से इस संबंध में एक अनूठा ऑफर मिला है। उन्हें एक कंपोजीशन चाहिए, जिसमें गांधी जी चरखा चला रहे हैं और आइंस्टाइन बैठे लिख रहे हैं। इसे वे ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां तमाम पर्यटक इन दोनों विश्व-विभूतियों को एक साथ देख सकें।

आपने तमाम महापुरुषों की मूर्तियां बनाई हैं। सबसे ज्यादा मांग किसकी मूर्तियों की होती है?
सबसे ज्यादा मूर्तियां मैंने गांधी की बनाई हैं। दुनिया के लगभग हर देश में उनकी मांग है।

देश-विदेश में आपकी बनाई हुई कितनी गांधी-प्रतिमाएं लगी होंगी?
भारत से बाहर करीब 70 देशों में मेरी बनाई हुई मूर्तियां लगी हुई हैं। दिल्ली में संसद भवन, गांधी स्मृति और राजघाट के अलावा देश के लगभग सभी राज्यों में, सभी प्रमुख शहरों में मेरे बनाए गांधी लगे हुए हैं।

अब तक का सबसे बड़ा स्कल्पचर आपने किसका बनाया है?
सबसे बड़ी मूर्ति चंबल नदी की है। 45 फीट ऊंची यह मूर्ति कोटा के पास है, जहां गांधी सागर बांध बना है। पहले वहां बांध बनाने को लेकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में विवाद था। मैंने चंबल को मां के रूप में दिखाया और मध्यप्रदेश व राजस्थान को उसके बच्चों के रूप में दिखाया। नेहरू जी उद्घाटन के लिए आए, तो उन्हें यह आइडिया बहुत पसंद आया। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में लगी कृष्ण-अर्जुन संवाद की प्रतिमा भी काफी विशाल है। यह 60 फीट लंबी और 35 फीट ऊंची है। इस प्रतिमा को बनाने से पहले मैंने गीता का गहन अध्ययन किया, ताकि उसके संदेश को सही तरीके से मूर्तिवंत कर सकूं। मैं जिस भी पर्सनैलिटी की प्रतिमा बनाता हूं, उसके व्यक्तित्व के एक-एक पहलू का अध्ययन करता हूं, ताकि प्रतिमा में उसका व्यक्तित्व झलक सके।

आपके बनाए हुए नवीनतम मूर्तिशिल्प कहां इंस्टॉल किए गए हैं?
नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल में मेरे बनाए 9 मूर्तिशिल्प लगे हैं। इनमें दलित नायकों-चिंतकों के जीवन चरित हैं।

ऐसा कौन सा ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे आप अभी पूरा नहीं कर सके हैं?
बचपन में मैं चाहता था कि एक ऐसी हनुमान प्रतिमा बनाऊं, जिसके हृदय में विराजित राम, लक्ष्मण और सीता लाइफ साइज के हों। अभी मेरा सपना है कि मैं दुनिया का सबसे ऊंचा स्कल्पचर बनाऊं। यह स्कल्पचर गांधी जी का होगा। और स्टेच्यू आफ लिबर्टी की तरह इसमें एक संदेश भी होगा। इसमें गांधीजी दो वंचित बच्चों के साथ होंगे, जो शांति और सामाजिक न्याय का प्रतीक होगा। इसके अलावा मैं एक मान्यूमेंट प्रगति का भी बना चाहता हूं, जिसमें मनुष्याकृतियों का एक पिरामिड होगा, जो आकाश छूने को ललक रहा है। अगर कोई मुझे जगह और संसाधन उपलब्ध करा दे, तो मैं इन पर काम करना चाहता हूं।

आपने विचारों की बात की। ललित कला में विचार की कितनी अहमियत है।
विचारों के बिना कला वैसी ही है, जैसे सुगंध के बिना फूल। जैसे प्राण के बिना शरीर।

कलाकार में जन्म से ही नैसर्गिक प्रतिभा होती है, या शिक्षा देकर कलाकार बनाया भी जा सकता है?
देखिए हर व्यक्ति में बचपन से ही किसी चीज की ओर स्वाभाविक रुझान होता है। अच्छा शिक्षक उसके रुझान को भांपकर उसकी प्रतिभा को निखारता है। साथ ही व्यक्ति की निजी साधना भी उसकी प्रतिभा को निखारती है।

आपने पहला स्कल्पचर कब बनाया था?
बचपन में पहला स्कल्पचर बिच्छू का बनाया था। एक मरे हुए बिच्छू को साबुन की टिकिया पर चिपकाकर मैंने उसका छाप लिया था।

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