सोमवार, 12 दिसंबर 2011

विश्वविद्यालय

(अमर उजाला से)

किसके भरोसे चल रहे हैं देश के ये विश्वविद्यालय

नई दिल्ली।
Story Update : Tuesday, December 13, 2011    2:18 AM
University of the trust who are running
देश में उच्च शिक्षा की स्थिति में सुधार के लिए भले ही सरकार भले ही तमाम दावे करे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि स्थिति बदहाल हो चुकी है। इंटरमीडिएट के बाद कुल 15 फीसदी छात्र ही उच्च शिक्षा के लिए दाखिला ले पाते हैं। सरकार इसे ड्राप आउट की समस्या मानकर पल्ला झाड़ लेती है लेकिन विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को भी इससे जोड़कर देखा जाना चाहिए।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 39 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं। इनको भरने के लिए भी केंद्र सरकार सीधी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। राज्यसभा में सांसद सत्यब्रत चतुर्वेदी द्वारा विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों के बारे में पूछे एक सवाल के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जो जवाब दिया है वह दीपक तले अंधेरा जैसी स्थिति दर्शाता है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 16,948 शिक्षकों के स्वीकृत पदों में से 6620 खाली हैं। इसी तरह गैर शिक्षक कर्मचारियों के भी करीब 25 फीसदी यानी 8559 पद रिक्त हैं। राज्य सरकारों द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के आंकड़े यद्यपि मानव संसाधन मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है लेकिन सूत्रों का दावा है कि वहां स्थिति कहीं ज्यादा खराब है। पदों को भरे जाने के बारे में सीधे मानव संसाधन मंत्रालय ने यह कहते हुए दखल देने से इंकार किया है।

मंत्रालय के मुताबिक विश्वविद्यालय स्वायत्तशासी हैं इसलिए रिक्त पदों को यूजीसी के माध्यम से भरा जाना चाहिए। मानव संसाधन मंत्रालय ने शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अवकाश प्राप्त करने वाले शिक्षकों को ही कांट्रैक्ट पर फिर से नियुक्त करने का भी सुझाव दिया है। यही नहीं ऐसे संस्थानों में शिक्षकों के अवकाश प्राप्त करने की उम्र भी बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है।

डीयू में 50 फीसदी पद खाली
दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग पचास फीसदी अध्यापकों के पद इस समय खाली पड़े हैं। बाहरी राज्यों का हाल तो और भी खराब है। हरियाणा के गुरु घासीदास विवि में 75 फीसदी, इलाहाबाद विवि में 45 फीसदी, बनारस हिंदू विवि में 35 फीसदी, केंद्रीय विवि बिहार में 86 फीसदी, केंद्रीय विवि गुजरात में 80 फीसदी, केंद्रीय विवि हरियाणा में 89 फीसदी, केंद्रीय विवि हिमाचल प्रदेश में 88 फीसदी, केंद्रीय विवि कश्मीर में 91 फीसदी, केंद्रीय विवि केरल में 94 फीसदी तथा केंद्रीय विवि पंजाब में 84 फीसदी शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। मानव संसाधन मंत्रालय के अनुसार, यहां शिक्षकों के पद उनके रिटायर होने, इस्तीफा देने, मौत होने या डेपुटेशन पर चले जाने से खाली हुए हैं।

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