बुधवार, 21 दिसंबर 2011

कला मेला की परंपरा







कला मेला  की परंपरा पुरानी रही है, परन्तु समय की व्यस्तताओं कों देखते हुए हम इससे दूर होते गए हैं अन्यथा समय और हुनर की पहचान तो मेलों से ही होती है, चित्रकला विभाग ऐसी गति विधियों कों लेकर व्यवहारिक प्रयोग करना आरम्भ किया है,जिसमें पिछले दिनों की गतिविधियाँ काफी चर्चा में रही हैं. उसी क्रम में हमने "कला मेला" का आयोजन किया है जिसका उद्येश्य नव वर्ष पर "ग्रीटिंग" हेतु छोटे छोटे कार्ड के आकार के हस्त निर्मित चित्र बच्चों ने तैयार किये हैं, और इस मेले में उन्होंने इन्ही चित्रों कों प्रदर्शित किया है |
आज के इस कला मेले का शुभारम्भ डॉ.आर एम्. जौहरी ने किया और इस अवसर पर डॉ. के.एन.आरोरा डॉ. लाल रत्नाकर एवं चित्रकला विभाग के छात्र छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की सुरुआत की. इसमे दिन भर महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने छात्रों कों प्रोत्साहित किया |

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