फुर्सत के क्षण








जब भी इन्हें मौका मिलता है अपने स्वभाव और संस्कृति के अनुरूप आचरण करती हैं  वो भूल जाती हैं की उनके इस आचरण से और छात्रों पर भी असर पड़ता है।

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