अकबर, जहांगीर या फिर सबसे कट्टर मुग़ल शासक, सभी खेलते थे रंगों की होली!
Gagan Gurjar | Mar 22, 2013, 01:59AM IST
27 मार्च को होली का त्यौहार है।वैसे तो होली का त्यौहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन इस त्यौहार में रंगों के साथ - साथ देखने को मिलती हैं कुछ परम्पराएं जो सहसा ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं।dainikbhaskar ,com अपने पाठकों के लिए लाया है एक सीरीज, जिसके तहत होली की विभिन्न परम्पराओं और ऐतिहासिक तथ्यों से आपको रूबरू कराया जाएगा।इस सीरीज की आज की कड़ी में पेश है मुग़ल काल के कुछ उदाहरण जो साबित करते हैं उस समय भी खेली जाती थी होली..
पढ़िए, मुग़ल काल की होली के कुछ उदाहरण...
रंगों का त्यौहार होली पूरी दुनिया में अपने अनोखे अंदाज के लिए जाना जाता है।कहते हैं कि इस दिन रंगों में रंग ही नहीं मिलते बल्कि दिल भी आपस में मिल जाते हैं। फिल्म शोले के एक सुप्रसिद्ध गाने के बोल भी इसी ओर इशारा करते हैं।हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन माह में होली का त्यौहार मनाया जाता है, इस माह की पूर्णिमा को पूरी दुनिया में होली पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
मान्यता के अनुसार होली पूर्णिमा के दिन हिरणकश्यपू नाम के राक्षस ने अपने पुत्र प्रहलाद को होलिका की गोद में बिठाकर आग लगा दी थी लेकिन इस आग में होलिका जलकर भस्म हो गई और भगवान विष्णु का भक्त होने के कारण प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ जबकि होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था।तभी से होली पूर्णिमा के दिन होलिका दहन की परंपरा चल निकली।होलिका दहन की इस परंपरा और कथा के बारे में सभी जानते हैं।
होली खेलने की परंपरा कोई आधुनिक परंपरा नहीं है इसका उल्लेख हमारे धार्मिक ग्रंथों नारद पुराण, भविष्य पुराण में मिलता है।कुछ प्रसिद्ध पुस्तकोंजैसे जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र में भी होली पर्व के बारे में वर्णनं किया गया है।
आगे की स्लाइड्स में जानिए, मुग़ल काल में कैसे खेली जाती थी रंगों की होली....
औरंगजेब के बारे में लोगों की राय है कि वह बहुत ही कट्टर पृवृत्ति का शासक था लेकिन शायद यह कम ही लोग जानते होंगे कि औरंगजेब को भी रंगों से बहुत प्यार था और उसके समय में लोग अलग-अलग टोलियां बनाकर रंगों के इस त्यौहार का लुत्फ़ उठाया करते थे।औरंगजेब की होली का वर्णन स्टेनले लेन पूल की पुस्तक औरंगजेब में मिलता है।
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