"विवेचक"
यद्यपि प्राचार्य के रूप में सफल होना और उप कुलपति के रूप में सफल होने में बहुत फर्क होता है. क्योंकि बहुत सरे असफल प्राचार्यों की कार्य प्रणाली पर भी जिम्मेदारी होती है उप कुलपति की.
यद्यपि प्राचार्य के रूप में सफल होना और उप कुलपति के रूप में सफल होने में बहुत फर्क होता है. क्योंकि बहुत सरे असफल प्राचार्यों की कार्य प्रणाली पर भी जिम्मेदारी होती है उप कुलपति की.
जिस अराजकता का हवाला देकर प्रोफ.गुप्ता ने विश्वविद्यालय छोड़ा है वह कल्पना से परे ही है आज जहाँ दुनिया बदलाव के माहौल में अपनी समस्यायों जूझ रही हो उससे निकालने का रास्ता तलास रही हो नए रास्ते तलासने में व्यस्त हो वहां जिस कुलपति ने शिक्षा के आंगन में 'गुंडों' की भरमार का नज़ारा देखा हो, वहीँ अब एक एसे कालेज के वरिष्ठतम प्राचार्य यह दायित्व संभालने जा रहे हैं देखिये इनकी कथनी और करनी का फार्मूला कितना कामयाब होता है-
Sep 23, 09:49 pm
मेरठ : चौ. चरण सिंह विवि के नव नियुक्त कुलपति डा. विपिन गर्ग के पास लगभग 20 बरस का शिक्षण संस्थान चलाने का प्रशासनिक अनुभव है। बतौर शिक्षक भले ही वे 19 बरस रहे, लेकिन एक कामयाब कालेज प्राचार्य का उनका 21वां बरस चल रहा है। सीसीएस विवि के अधीन आने वाले कालेजों के वे सबसे वरिष्ठ प्राचार्य हैं। राजभवन ने उनकी इन्हीं योग्यताओं का आकलन करने के बाद सीसीएसयू की कमान उन्हें सौंपी है। डा. विपिन गर्ग ने पदभार संभालने के साथ ही विवि में प्रशासनिक और अकादमिक सुधार को दिशा देने के इरादे स्पष्ट कर दिये।
विशेष बातचीत...
प्रश्न : लंबे अरसे तक प्राचार्य रहने के बाद कुलपति का दायित्व मिलने के बाद आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
डा. गर्ग - राजभवन ने फिलहाल 6 माह के लिए सीसीएसयू के कुलपति का पदभार दिया है। विवि की शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के साथ प्रशासनिक तालमेल बेहतर करना पहली प्राथमिकता होगी।
प्रश्न : माना जाता है कि सीसीएसयू के कुलपति का पद बेहद चुनौती भरा होता है, ऐसे में आपकी कार्यशैली क्या रहेगी?
डा. गर्ग - किसी भी प्रशासनिक पद की तरह विवि के कुलपति की सफलता इस बात पर निहित करती है कि कथनी और करनी में फर्क न हो। किसी भी विवाद को बढ़ाने या खत्म करने में संवादहीनता की मुख्य भू्मिका रहती है। मेरा प्रयास रहेगा कि छात्र, शिक्षक, गैर शिक्षक, छात्र संगठनों के साथ बेहतर संवाद कर प्रशासनिक हल निकाले जाएंगे।
प्रश्न : विवि में छात्र संगठनों का दबदबा और दो माह से पनपे हालत का आपको क्या समाधान लगता है?
डा. गर्ग- पहले चीजों को समझना होगा। अगर छात्रों की कोई समस्याएं हैं तो उसका हल बातचीत कर हो सकता है। उनकी जायज समस्याओं का समाधान जल्द करने से उनका विश्वास प्रशासन पर बढ़ता है। मैं बातचीत का पक्षधर हूं। पूर्व कुलपति ने विवि में पुलिस बेरिकेडिंग आदि जो फैसले लिये हैं उनका प्रशासनिक पक्ष देखने के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।
प्रश्न : हाल में विवि में कई प्रशासनिक गड़बड़ियां हुई और उनकी जांच में शिथिलता के आरोप लगते रहे उनसे कैसे निपटा जाएगा
डा. गर्ग- मेरे संज्ञान में ऐसे मामले हैं जिनको लेकर जांच चल रही है। जिन भी मामलों की जांच कमेटियां गठित हुई हैं उनकी रिपोर्ट आने में हो रही देरी के कारणों की समीक्षा कर जो आवश्यक कार्यवाही है वो की जाएगी।
प्रोफाइल
मूल निवासी- नगीना, जिला बिजनौर
एमएससी बॉटनी - सीसीएसयू देहरादून
पीएचडी - धारवाड़ (कर्नाटक)
पोस्ट डॉक्टरेट -पीयू चंडीगढ़
1972- 91 - बॉटनी विभागाध्यक्ष केएल डीएवी कालेज रुड़की
एआइसीटी सलाहकार समिति सदस्य 1997-98
1991 से 2011- प्राचार्य आइपी कालेज बुलंदशहर।
एक एसे कालेज के वरिष्ठतम प्राचार्य निश्चित रूप से यहाँ की तकनीक समझते हैं यहाँ के छात्रों की राजनीती से वह वाकिफ होंगे यहाँ के नेताओं पर भी उनकी पकड़ होगी, शिक्षक नेताओं के वह संरक्षक रहे होंगें, विश्वविद्यालय कर्मचारियों से उनका पाला पड़ा होगा एक एक के सुकर्म और कुकर्मों से भलीभांति वाकिफ होंगे पर क्या सचमुच सब एक दिन में जादुई छड़ी जैसा बदल जायेगा या गहरे कहीं दब जायेगा क्योंकि वह एक सफल प्रिंसिपल रहे हैं .
डॉ. तनेजा लगभग इन्ही विशेषतायों को रखते थे, लेकिन क्या हुआ उनके साथ और तो और विश्वविद्यालय की राजनीती और कालेज से गया हुआ प्रिंसिपल जिन्हें युनिवेर्सिटी का एक एक चपरासी तक जानता है. निश्चित रूप से वह सफल हो जाएंगे यदि वह अपने यहाँ के चापलूस अध्यापकों की नियति जैसा आकलन कर चला पाए तो पर वह तो विश्वविद्यालय है और यहाँ जमावड़ा होगा ही नानाप्रकार के तत्वों का 'शिक्षा माफियायों का और नेताओं और उनकी नियति की कीमत वसूलने वाले कार्यकर्ताओं का.
फिर भी विश्वविद्यालय आस लगाये बैठा है एसे किसी कर्मठ उप कुलपति का जो इसे सुधार सके. आशा है गर्ग साहब को यह सुयश जाये.
फिर भी विश्वविद्यालय आस लगाये बैठा है एसे किसी कर्मठ उप कुलपति का जो इसे सुधार सके. आशा है गर्ग साहब को यह सुयश जाये.

