शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

गाज़ियाबाद का कला परिदृश्य ;

गाज़ियाबाद का कला परिदृश्य ;
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महानगरीय अवधारणा के आड़ में अनेकों विसंगतियों का शहर होकर रह गया है ये महानगर, इसके बनने के जो खतरे थे वे नज़र आने लगे हैं जब संतोष कुमार यादव के साथ शहर के कला स्वरुप की अभिव्रिद्धि के लिए एक सपना संजोया था तब मुझे लगा था की यह शहर कला के लिए कुछ जगह बनाएगा पर जो कुछ हुआ उसे ही लिखने का मन हो रहा है।



मंगलवार, 25 नवंबर 2014

कला प्रदर्शनियां

2023
नमस्कार मित्रों!

लंबे समय के बाद मैं चित्रकला विभाग गया अवसर था त्रिक्ला विभाग में एम ए फाइनल के विद्यार्थियों की चित्र प्रदर्शनी का, महाविद्यालय के बाहर से ही दिख रहा था कि चित्रकला विभाग की प्रदर्शनी आयोजित की गई है जिसके बड़े-बड़े बैनर बाहर भी लगे हुए थे।


मैं भी प्रवेश द्वार से अपने वाहन सहित न्यू जिमनेजियम की तरफ बढा, विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने की वजह से सजे हुए मंच पर मैं भी पहुंचा ससम्मान मुख्य अतिथि जो विश्वविद्यालय के राजनीति के प्रोफेसर एवं दिनांक आर्ट फैकल्टी के रूप में विराजमान है के साथ बिठाया गया। कार्यक्रम वैसे भी विलंब से शुरू हो रहा था क्योंकि मुख्य अतिथि महोदय को आने में विलंब हुआ था। 

जैसा की पहली बार हुआ प्राचार्य जी अन्य कार्यक्रम में व्यस्त थे और वह उपस्थित नहीं थे। पहली बार यह भी दिखाई दे रहा था कि जिन लोगों की चित्रकला विभाग में कभी कोई रुचि नहीं थी वह अध्यापक भी वहां मौजूद थे और उनमें से एक तो मंच पर विराजमान थे। इस आयोजन में मेरे आने से हो सकता है कुछ लोगों में असहजता हुई हो क्योंकि जब कार्यक्रम में मैं बोलना शुरू किया तो वही चेहरे बाहर थे जो अक्सर मेरे समय में नजर नहीं आते थे।
इससे इस बात का भान तो हो गया कि उनकी रुचि चित्रकला के अलावा हर तरह के षड्यंत्र में हो सकती है परंतु जब मेरे उद्बोधन का उन पर असर पड़ता और वह भी कुछ कल के संबंध में समझ पाए तो देखा कि वह कला मंडप से बाहर थे।

विद्यार्थियों में बहुत उत्साह था सारे विद्यार्थी पूर्ण रूप से शांत होकर मेरी बात सुन रहे थे और समय-समय पर तालियों से बातों का समर्थन भी कर रहे थे।
मैंने कई बिंदुओं पर बहुत स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी और इस बात को विशेष रूप से चिन्हित किया की चित्रकला विभाग अपनी एक पहचान दर्ज किया है विश्वविद्यालय स्तर पर और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। इसको कायम रखा जाना चाहिए, मेरे आने के बाद के प्राध्यापक जिनमें श्री मूलचंद वर्मा जी आजकल अध्यक्ष हैं बहुत ही शिद्दत से अपने काम में लगे हैं और एक संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।

लेकिन महाविद्यालय के कुछ तिकड़मी प्राध्यापक को द्वारा महाविद्यालय में खासकर की चित्रकला विभाग को उन्होंने अपनी षड्यंत्र का केंद्र बनाया हुआ है जो विभाग के लिए सर्वथा अनुचित है। जबकि विश्वविद्यालय के प्रावधानों में वरिष्ठ प्राध्यापक को विभाग का इंचार्ज बनाया जाता है और लगभग सभी विभागों में यही व्यवस्था है लेकिन चित्रकला विभाग के साथ पिछले दिनों जो सुनने में आया था उसमें कनिष्ठ प्राध्यापक को उन्हें षड्यंत्रकारी अध्यापकों के चलते इंचार्ज बनाने की सुगबुगाहट थी, लेकिन प्राचार्य ने वरिष्ठ प्राध्यापक को वरीयता दी।

हालांकि महाविद्यालय स्तर पर भी बात का विरोध था चित्रकला विभाग के इस व्यवस्था से जो षड्यंत्र किया जा रहा था वह किसी को भी पसंद नहीं था मुझे भी अनेकों लोगों ने ऐसा बताया था।
सेवानिवृत्ति के बाद विभाग से मेरी कोई बहुत रुझान इसलिए नहीं थी कि मुझे पता था की विभाग को जितने समय की जरूरत होती है वह प्राध्यापकों द्वारा दिया जाना इसलिए भी संभव नहीं था क्योंकि उन्हें अनेकों अन्य कार्यों से खुद को जोड़ा गया था। यही कारण था कि वहां के अन्य शिक्षक भी अन्य अनेक तरह के कार्यों में उलझाए गए रहे होंगे जिससे विभाग की वह स्थिति संभव ही नहीं थी। जबकि मेरे समय में पूरी व्यवस्था के साथ संघर्ष करके चित्रकला विभाग में सुविधाओं के लिए निरंतर संघर्षरत रहा।


हालांकि प्रबंधन उस समय जितना सहयोगी हो सकता था सहयोग करता था अनेक कार्यवाहक प्राचार्य भी चित्रकला विभाग को पूर्ण सहयोग प्रदान करते रहे और चित्रकला विभाग अपनी ऊंचाइयों को छूता चला गया।
आज इस बात की खुशी हुई श्री मूलचंद वर्मा के अध्यक्षता में चित्रकला विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी प्रदर्शनी को बहुत ही सुंदर ढंग से आयोजित किया था और प्रदर्शनी का हाल भी साफ सुथरा था।


मैंने प्रदर्शनी की उद्घाटन के उपरांत एक-एक विद्यार्थी के कार्य को भलीभांति देखा और उनमें जो सुझाव बन पड़ा उसको उठे दिया और उसको उन्होंने बहुत ही गंभीरता से लिया है मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में निश्चित रूप से यह विद्यार्थी और बेहतर कार्य करेंगे ऐसा मेरा विश्वास है।
सेवानिवृत्त  प्राध्यापकों में कोई विशेष रूप से वहां इस बार नजर नहीं आया इस बात की चिंता होती रही।


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2014
ग़ाज़ियाबाद में पिछले दिनों कई कला प्रदर्शनियां आयोजित हुईं जिनमे चित्रकला विभाग के विद्यार्थियों की वार्षिक चित्रकला प्रदर्शनी बहुत ही महत्वपूर्ण रही।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री रविन्द्र गोडबोले (आई ए यस) सचिव, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण गाजियाबाद ने किया।
इनके अलावा कविनगर स्थित कलाधाम में अखिल भारतीय कला उत्सव के कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनियां के बाद
 निम्न चित्रकारों की प्रदर्शनियां आयोजित हुयी हैं।
1 - श्रीमती विनीता एवं कु. हिहानी गौतम
2- कु. नेहा अग्रवाल, कु. शोभा पाल, कु. शबनम हलीम और कु. सोनम त्यागी

सोमवार, 9 दिसंबर 2013

उ प्र राज्य ललित कला अकादेमी कि क्षेत्रीय प्रदर्शनी

एम् एम् एच कालेज गाज़ियाबाद , चित्रकला विभाग के इन विद्यार्थियों ने उ प्र राज्य ललित कला अकादेमी कि क्षेत्रीय प्रदर्शनी-2013 सहारनपुर में इन्हे चुना गया है -
1. हिहानी गौतम
2. प्रीती
3. विनीता
4. आकांक्षा
5. प्रतिभा
6. प्रगति
7. नेहा
मेरा भी चित्र इसमें शरीक रहेगा।

आप इसे मूल रूप में प्रदर्शनी में देख पाएंगे , इसके अलावा इन विद्यार्थियों के चित्र निचे दिए जा रहे हैं।
-डॉ लाल रत्नाकर
अध्यक्ष
चित्रकला विभाग
एम् एम् एच कालेज गाज़ियाबाद
ये विद्यार्थी ;






शनिवार, 30 नवंबर 2013

पेंटिंग प्रतियोगिता "बेटी बचाओ"

मित्रों 


साथियों !
अमर उजाला ने एक दायित्व दिया है कि मैं उत्तर प्रदेश एवं उत्तरांचल के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को उनके पेंटिंग प्रतियोगिता "बेटी बचाओ" के आयोजन में आपकी सहभागिता सुनिश्चित कराने में सहयोग करें इसी आशय का यह पत्र संलग्न कर रहा हूँ, कई मित्रों एवं विभागों के ई मेल न होने कि वजह से यह पत्र पोस्ट से भेजा जा रहा है परन्तु यदि आप अपना मेल हमें भेज सकें तो आपको यह पत्र अलग से प्रेषित करने में सुविधा होगी मेरा मेल का पता है -ratnakarartist@gmail.com,drgptgmmh@gmail.com आशा है आप अवश्य भागिदार बनेंगे।
(प्रतियोगिता सबके लिए है यदि आप इन प्रदेशों से हैं तो आप इसमें भागीदारी कर सकते हैं)


रविवार, 10 नवंबर 2013

चित्रकला विभाग के छात्रों कि प्रदर्शनी का शुभारम्भ करते हुए श्री एस वी  एस रंगाराव जिलाधिकारी  गाजियाबाद को विद्यार्थियों के कार्यों से अवगत कराते हुए डॉ लाल रत्नाकर अध्यक्ष चित्रकला विभाग
http://www.paintingsmmh.blogspot.in/p/blog-page_30.html

















सोमवार, 24 जून 2013

इन दिनों !

कला शिक्षा के जिस मुकाम पर आज के विद्यालय पहुंचे हैं वहां से आगे जाना वास्तव में भयावह है .
इस बीच कई विद्यालयों में परीक्षक के नाते जाने का मौका मिला जैसी स्थितियां वहां की हैं उसका कोई अंदाज़ा लगना भी शायद ही संभव हो.
बिना शिक्षक के विषय चलाये जा रहे हैं, पाठ्यक्रम तक का तो ज्ञान ही नहीं है.
भगवान ही मालिक है .