गाज़ियाबाद का कला परिदृश्य ;
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महानगरीय अवधारणा के आड़ में अनेकों विसंगतियों का शहर होकर रह गया है ये महानगर, इसके बनने के जो खतरे थे वे नज़र आने लगे हैं जब संतोष कुमार यादव के साथ शहर के कला स्वरुप की अभिव्रिद्धि के लिए एक सपना संजोया था तब मुझे लगा था की यह शहर कला के लिए कुछ जगह बनाएगा पर जो कुछ हुआ उसे ही लिखने का मन हो रहा है।
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महानगरीय अवधारणा के आड़ में अनेकों विसंगतियों का शहर होकर रह गया है ये महानगर, इसके बनने के जो खतरे थे वे नज़र आने लगे हैं जब संतोष कुमार यादव के साथ शहर के कला स्वरुप की अभिव्रिद्धि के लिए एक सपना संजोया था तब मुझे लगा था की यह शहर कला के लिए कुछ जगह बनाएगा पर जो कुछ हुआ उसे ही लिखने का मन हो रहा है।






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