रविवार, 30 सितंबर 2012

WWW.BBCHINDI.COM
से साभार यह लेख आमजन के लिए भी उपयोगी है। यद्यपि आमजन में यह विश्वास आज भी कायम है पर जिसे हम सभी समाज कहते हैं वह  बुरी तरह से इन दुर्गुणों में लिप्त है, उसे पाप पुन्य से कोई लेना देना नहीं क्योंकि वह  सदियों से इनके मतलब अच्छी तरह से जानता है पर इनसे वह  कैसे लाभन्वित होता है यही गुण उसमें दर्शनीय होता है-

दुनिया के सात महापाप क्या हैं?

 गुरुवार, 27 सितंबर, 2012 को 13:47 IST तक के समाचार
पेटूपन न सिर्फ़ बुराईयों की जड़ है यह आपका स्वास्थ भी ख़राब करता है
अकसर आप लोगों ने दुनिया के सात आश्चर्य यानी seven wonders के बारे में सुना पढ़ा, और देखा होगा. इन अजूबों में अब भारत का ताजमहल भी शामिल है, लेकिन क्या आप सात महापाप के बारे में भी जानते हैं?
हम लेकर आए हैं दुनिया के सात महापाप. क्या होते हैं ये सात महापाप? अंग्रेज़ी भाषा और पश्चिमी साहित्य एवं संस्कृति में इसे किस प्रकार देखा जाता है?
अंग्रेज़ी में इन्हें सेवेन डेडली सिंस (Seven deadly sins) या कैपिटल वाइसेज़ (Capital vices) या कारडिनल सिंस (Cardinal sins) भी कहा जाता है.
जब से मनुष्य ने होश संभाला है तभी से उनमें पाप-पुण्य, भलाई-बुराई, नैतिक-अनैतिक जैसे आध्यात्मिक विचार मौजूद हैं. सारे धर्म और हर क्षेत्र में इसका प्रचलन किसी न किसी रूप में ज़रूर है.
यह सेवेन डेडली सिंस (Seven deadly sins) या कैपिटल वाइसेज़ (Capital vices) या कारडिनल सिंस (Cardinal sins) इस प्रकार हैं:
लस्ट (Lust)
ग्लूटनी (Gluttony)
ग्रीड (Greed)
स्लौथ (Sloth)
रैथ (Wrath)
एनवी (Envy)
प्राइड (Pride)

ये सारे शब्द भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun) के रूप हैं. लेकिन इनमें से कई का प्रयोग क्रिया और विशेषण के रूप में भी होता है. अगर इन्हें ग़ौर से देखें तो पता चलता है कि इन सारे महापाप की हर जगह भरमार है.
पुराने ज़माने में इन सब को बड़े पाप में शामिल किया जाता था और उनसे बचने की शिक्षा दी जाती थी. पुराने ज़माने में ईसाई धर्म में इन सबको घोर पाप की सूची में रखा गया था क्योंकि इनकी वजह से मनुष्य सदा के लिए दोषी ठहरा दिया जाता था और फिर बिना कंफ़ेशन के मुक्ति का कोई चारा नहीं था.
सेक्स शॉप
कामवासना या कामुकता को सात महापापों में से एक माना जाता है.
लस्ट (Lust) यानी लालसा, कामुकता, कामवासना (Intense or unrestrained sexual craving)- ये मनुष्य को दंडनीय अपराध की ओर ले जाते हैं और इनसे समाज में कई प्रकार की बुराईयां फैलती हैं. विशेषण में इसे लस्टफुल (lustful) कहते हैं
ग्लूटनी (Gluttony) यानी पेटूपन. इसे भी सात महापापों में रखा गया है. जी हां दुनिया भर में तेज़ी से फैलने वाले मोटापे को देखें तो यह सही लगता है कि पेटूपन बुरी चीज़ हैं और हर ज़माने में पेटूपन की निंदा हुई है और इसका मज़ाक़ उड़ाया गया है. ठूंस कर खाने को महापाप में इस लिए रखा गया है कि एक तो इसमें अधिक खाने की लालसा है और दूसरे यह ज़रूरतमंदों के खाने में हस्तक्षेप का कारण है.
मध्यकाल में लोगों ने इसे विस्तार से देखा और इसके लक्षण में छह बातें बताईं जिनसे पेटूपन साबित होता है. वह इस प्रकार हैं.
eating too soon--------------eating too eagerly
eating too expensively----- eating too daintily
eating too much-------------eating too fervently
ग्रीड (Greed) यानी लालच, लोभ. यह भी लस्ट और ग्लूटनी की तरह है और इसमें अत्यधिक प्रलोभन होता है. चर्च ने इसे सात महापाप की सूची में अलग से इस लिए रखा है कि इसमें धन-दौलत का लालच शामिल है (An excessive desire to acquire or possess more than what one needs or deserves, especially with respect to material wealth)
स्लौथ (Sloth) यानी आलस्य, सुस्ती और काहिली (Aversion to work or exertion; laziness; indolence). पहले स्लौथ का अर्थ होता था उदास रहना, ख़ुशी न मनाना.
इसे महापाप में इसलिए रखा गया था कि इसका मतलब था ख़ुदा की दी हुई चीज़ से परहेज़ करना. इस अर्थ का पर्याय आज melancholy, apathy, depression, और joylessness होगा. बाद में इसे इसलिए पाप में शामिल रखा गया क्योंकि इसकी वजह से आदमी अपनी योग्यता और क्षमता का प्रयोग नहीं करता है.
रैथ (Wrath) ग़ुस्सा, क्रोध, आक्रोश. इसे नफ़रत और ग़ुस्से का मिला जुला रूप कहा जा सकता है जिसमें आकर कोई कुछ भी कर जाता है. ये सात महापाप में अकेला ऐसा पाप है जिसमें आपका अपना स्वार्थ शामिल न हो (Forceful, often vindictive anger)
एनवी (Envy) यानी ईर्ष्या, डाह, जलन, हसद. यह ग्रीड यानी लालच से इस अर्थ में अलग है कि ग्रीड में धन-दौलत ही शामिल है जबकि यह उसका व्यापक रूप है. यह महापाप इसलिए है कि कोई गुण किसी में देख कर उसे अपने में चाहना और दूसरे की अच्छी चीज़ को सहन न कर पाना.
प्राइड (Pride) यानी घमंड, अहंकार, अभिमान को सातों माहापाप में सबसे बुरा पाप समझा जाता है. किसी भी धर्म में इसकी कठोर निंदा और भर्त्सना की गई है. इसे सारे पाप की जड़ समझा जाता है क्योंकि सारे पाप इसी के पेट से निकलते हैं. इसमें ख़ुद को सबसे महान समझना और ख़ुद से अत्यधिक प्रेम शामिल है.
अंग्रेज़ी के सुप्रसिद्ध नाटककार क्रिस्टोफ़र मारलो ने अपने नाटक डॉ. फ़ॉस्टस में इन सारे पापों का व्यक्तियों के रूप में चित्रण किया है. उनके नाटक में यह सारे महापाप इस क्रम pride, greed, envy, wrath, gluttony, sloth, lust में आते हैं.
अब जबकि आपने सात अजूबों के साथ सात महापाप भी देख लिए हैं तो ज़रा सात महापुण्य भी देख लें. यह इस प्रकार हैं.
लस्ट (Lust)--------- Chastity पाकीज़गी, विशुद्धता,
ग्लूटनी (Gluttony)-- Temperance आत्म संयम, परहेज़,
ग्रीड (Greed)-------- Charity यानी दान, उदारता,
स्लौथ (Sloth)--------Diligence यानी परिश्रमी,
रैथ (Wrath)--------- Forgiveness यानी क्षमा, माफ़ी
एनवी (Envy)---------Kindness यानी रहम, दया,
प्राइड (Pride)-------- Humility विनम्रता, दीनता, विनय
तो फिर क्या सोच रहे हैं. चलिए इन महापापों से बचने और सदगुणों को अपनाना की प्रक्रिया शुरु कर दीजीए.

शनिवार, 22 सितंबर 2012

ईरानी युवतियां नहीं पढ़ेंगी इंजीनीयरिंग, साहित्य ..


ईरानी युवतियां नहीं पढ़ेंगी इंजीनीयरिंग, साहित्य ..

 रविवार, 23 सितंबर, 2012 को 01:02 IST तक के समाचार
ईरान महिला
ईरान में महिलाओं को क्षेत्र के दूसरे मुल्कों के मुक़ाबले काफ़ी आज़ादी हासिल है.
ईरान में 30 विश्वविद्यालयों ने 80 अलग-अलग विषयों के डिग्री पाठ्यक्रमों में महिलाओं के दाख़िले पर रोक लगा दी है.
जिन पाठ्यक्रमों में औरतों के दाख़िले पर प्रतिबंध लगाए गए हैं उनमें इंजीनियरिंग, नाभिकीय भौतिकी (न्यूक्लियर फ़िज़िक्स), कंप्यूटर साइंस, अंग्रेज़ी साहित्य और पुरातत्व शामिल हैं.
हालांकि सरकार ने नए नियमों पर कोई सफ़ाई नहीं दी है लेकिन नॉबेल पुरूस्कार विजेता शिरीन इबादी जैसे लोगों कहना है कि ये फ़ैसला हुकूमत की उन नीतियों का हिस्सा है जिसके तहत महिलाओं को शिक्षा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है.
शिरीन इबादी ने बीबीसी से कहा, "ईरानी प्रशासन शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की पहुंच को सीमित करने, समाज में उन्हें कम सक्रिय रखने और उन्हें घर की चाहरदीवारी तक सीमित करने के लिए बहुत सारे क़दम उठा रहा है."
"ईरानी प्रशासन शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की पहुंच को सीमित करने, समाज में उन्हें कम सक्रिय रखने और उन्हें घर की चाहरदीवारी तक सीमित करने के लिए बहुत सारे क़दम उठा रहा है."
शिरीन इबादी, नोबेल पुरस्कार विजेता
ईरान के उच्च शिक्षा मंत्री कामरान दानिशजू का कहना है कि नए नियमों को बहुत महत्व नहीं दिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि ईरान ने उच्च शिक्षा में युवाओं की शिरकत को हमेशा प्रोत्साहित किया है और नए नियमों के बावजूद विश्वविद्यालयों के नब्बे फ़ीसद कोर्सेस महिलाओं और पुरूष दोनों के लिए खुले हैं.

प्रोत्साहन

ईरान वो मुल्क है जिसने मध्य-पूर्व में सबसे पहले औरतों को विश्वविद्यालयों में शिक्षा हासिल करने की इजाज़त दी थी और 1979 के इस्लामी क्रांति के बाद से युवतियों को उच्च शिक्षा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है.
साल 2001 तक शिक्षा में औरतों की तादाद मर्दों से ज़्यादा हो चुकी थी. फ़िलहाल पूरे शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं की संख्या लगभग 60 प्रतिशत के आसपास है यानी संख्या के आधार पर वो पुरूषों से अधिक हैं.
ईरान आज़ादी
साल 2009 के प्रदर्शनों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.
विश्वविद्यालयों में महिलाओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. लोगों का कहना है कि इसके पीछे उनकी ज़िंदगी अपनी तरह से जीने और अधिक आज़ादी की चाहत है जो आर्थिक स्वतंत्रता की वजह से हासिल होगी.
लेकिन साल 2009 में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद मुल्क में रूढ़िवादी नेताओं की पकड़ मज़बूत हुई है. देश के प्रमुख नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने विश्वविद्यालयों के 'इस्लामीकरण' की मांग की है और कई ऐसे विषयों की कड़ी निंदा की है जिनमें उनके मुताबिक़ पश्चिम की बहुत ज़्यादा छाप है.

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

शादीशुदा थे ईसा मसीह?


क्या शादीशुदा थे ईसा मसीह?

 गुरुवार, 20 सितंबर, 2012 को 11:33 IST तक के समाचार
चौथी शताब्दी के इस दस्तावेज में ईसा मसीह की पत्नी का जिक्र होने का दावा किया गया है
ईसाई इतिहास के एक जानकार के मुताबिक एक प्राचीन भोजपत्र पर ईसा मसीह शादी-शुदा का स्पष्ट विवरण है.
रोम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हार्वर्ड विश्ववद्यालय की प्रोफेसर केरेन किंग ने चौथी शताब्दी के भोजपत्र में लिखे इस अभिलेख का ज़िक्र किया. ये भोजपत्र कूड़े के एक ढेर में मिला था.
उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं ने इन शब्दों को पहचान लिया है जिसमें ईसा मसीह अपनी पत्नी का ज़िक्र करते हैं. किंग के मुताबिक हो सकता है कि ये मेरी मैग्डेलन हों.
ईसाई मान्यताओं के मुताबिक ईसा मसीह अविवाहित थे, लेकिन केरेन किंग का कहना है कि बहुत पहले ये बहस का मुद्दा था.
उनका कहना था कि इस शोध से ईसा मसीह के ब्रह्मचर्य और ईसाइयत में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक नई बहस छिड़ सकती है.
"भोजपत्र पर लिखी चीज किसी बात का सबूत नहीं हो सकती. ये बिना किसी संदर्भ के हवा में दिया गया एक बयान जैसा है"
जिम वेस्ट, प्रोफेसर
लेकिन इस घोषणा ने धर्मशास्त्र के कई जानकारों को भड़का भी दिया है.
तेनेसी में एक प्रोफेसर और पादरी जिम वेस्ट कहते हैं, “भोजपत्र पर लिखी चीज किसी बात का सबूत नहीं हो सकती. ये बिना किसी संदर्भ के हवा में दिया गया एक बयान जैसा है.”

आशंका

जाने-माने भाषा वैज्ञानिक वोल्फ-पीटर भी इस सम्मेलन में मौजूद थे. उनका कहना था, “कूड़े के ढेरों में हजारों भोजपत्र पड़े हैं जिनमें बेतुकी बातें लिखी होंगी.”
सम्मेलन में कई ऐसे सवाल उठाए गए जिनका जवाब नहीं दिया जा सका.
लेकिन केरेन किंग का कहना था कि ये भोजपत्र ऐसा पहला धर्मलेख है जिसमें ईसा मसीह अपनी पत्नी को संबोधित कर रहे हैं.
उनके मुताबिक चौथी शताब्दी का ये दस्तावेज संभवत: मूल रूप से दूसरी शताब्दी में ग्रीक भाषा में लिखा गया था.
केरेन का कहना था कि शुरुआत में उन्हें लगा कि ये नकली है, लेकिन पूरी तरह से परीक्षण के बाद पता चला कि ये वास्तविक है.
उनका कहना था, “कई विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं लेकिन इस पर अंतिम निर्णय अभी और कई दौर के परीक्षणों के बाद ही लिया.
ईसा मसीह
ईसाई धर्म की मान्यता है कि ईसा मसीह ब्रह्मचर्य का पालन किया करते थे
केरेन का कहना था कि ये दस्तावेज ईसा मसीह की वैवाहिक स्थिति का प्रमाण नहीं था.
वहीं केंटकी में प्रोफेसर और बाइबिल के विद्वान बेन विदरिंगटन कहते हैं कि हो सकता है कि ‘वाइफ’ शब्द का इस्तेमाल किसी घरेलू नौकरानी या किसी अनुयायी के लिए किया गया हो.
केरेन के सहयोगी शोधकर्ताओं का कहना है कि इस दस्तावेज में ईसा मसीह अपने अनुयायियों से ये भी कहते हैं कि मेरी मैगेडेलेन को शिष्या बनाना फायदेमंद होगा.
इससे ये पुरानी धारणा भी खारिज होती है कि ईसा मसीह की कोई महिला शिष्य नहीं थी.
केरेन ने इन दस्तावेजों को रोम के ला सैपिएंजा विश्वविद्यालय में हुए छह दिवसीय सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किए थे.
मुरझाए हुए इस भोजपत्र का आकार बहुत छोटा है और इसमें काली स्याही से लिखी हुई आठ पंक्तियां हैं, जिन्हें लेंस की मदद से देखा जा सका.
केरेन ने बताया कि इन टुकड़ों को इकट्ठा करने वाले व्यक्ति ने उसका नाम सार्वजनिक न करने की अपील की है.