सोमवार, 25 जुलाई 2011

कौन आ रहे हैं

खोज खबर के अफवाहों के संवाददाता को पता चला है |
 (संबाददाता)
कि किसी के आने कि खबर के तहत पता चला है कि अफवाहों के बाजार गर्म हैं किसी को भी नियम कानून का अता पता नहीं है, कहते हैं कि आज आ रहे हैं, कल आ रहे हैं, और अब २८ को आ रहे हैं, कौन आ रहे हैं यह पूछने पर कोई बताने को तैयार नहीं होता कि कौन आ रहे हैं, बताते हैं सर्वोच्च न्यायलय से स्थगन आदेश मिल गया है; कब मिला ठीक से पता नहीं चलता, कोई कहता है मिलने वाला है, फला कह रहा था कि बाहर ड्राइवरों में चर्चा थी कि दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दे दिया है. कोई कह रहा था कि मुहूर्त निकाल रहें हैं क्योंकि १५ जुलाई निकल गयी है उस दिन के मुहूर्त पर मौलबी साहब फसे हुए थे, मौलबी साहब कि तैनाती पर ही सवाल खड़ा हो गया था, कि मौलबी के पद पर इनकी नियुक्ति ही गलत हुयी है. 
अब देखिये क्या होता है, पण्डे जी तो कह रहे थे कोई मुहूर्त ही नहीं बनता आने का, अब तो परमात्मा भी नहीं बदल सकते हैं मुहूर्त को क्योंकि, उपाध्याय जी ने सारे पंडितों को दिखा लिया है पर कोई 'मुहूर्त' नहीं निकला, अब कुछ नहीं होने जा रहा. इनकी मानें तो सब अफवाहें हैं पर काफी सशक्त लोबी चुप है और उसे पूरी उम्मीद है ''कि आयेंगे जुरूर चाहे जितनी कीमत देनी पड़े पुरोहित को'' अफवाह गुरु भागे हुए हैं कहते हैं कि इस बीच उनकी जगह उनकी अनिक्षित उत्तराधिकारीनि ने ले लिया है, पता नहीं इन गुरुओं को क्या हो गया है, जब देखो भाग खड़े होते हैं पर इन्हें कोई भगोड़ा ही नहीं कहता, इनको शर्म भी नहीं आती पता नहीं कहीं इन्ही के आने कि बात को हवा देकर अफवाह न फैला दी गयी हो. कि आने वाले हैं.
कल कह रहे थे कि भाई हिसाब से बोलो कुछ भी हो सकता है, पैसे में बड़ी ताकत होती है किसको पता था कि स्टे मिल जायेगा मिल गया, जब उनसे पूछा क्या मिला है स्टे में तो पता नहीं, पूछा आपने स्टे देखा तो नहीं. फिर क्या है उसमें, भाई समझने कि कोशिश करो पंगा मत लो कुछ भी हो सकता है. बात तो ठीक कह रहे हैं कुछ भी हो सकता है, हर तरफ एक ख़ामोशी है, उनके आने को लेकर सहमी हुयी सी, निराशा भी है बारात विदा होने से पहले ही दुल्हे के बीमार हो जाने का और डाक्टर के अनुसार अब कभी न ठीक होने का पर है कि मन मानता ही नहीं कि कौन सी ला इलाज नयी बीमारी आ गयी 'यह रोग तो पहले से ही था पर अच्छा खासा चल रहा था 'सेवक भी सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रहे थे , पर भला हो इस पाण्डेय का इसने जरूर डाक्टर को मिला लिया है जो बीमारी को ला इलाज बना दिया और बेड रेस्ट बता दिया होगा एक खबर यह भी है कि पीरबाबा अपनी जगह छोड़ कर चले गए, लगता है उन्हें भी एहशास हो गया होगा कि अब और आगे बात नहीं जाने वाली है. क्योंकि सच में बड़ी ताकत होती है , कहते हैं देर है पर अंधेर नहीं है. आखिर कर संसय पुरे माहौल में छाया है की पता नहीं कल क्या हो जय मालिकों पर भरोसा किया होता तो आने और जाने की नौबत ही क्यों आती आखिर कम तो चल ही रहा था, क्या आफत आ गयी थी ३३ दिन का ही तो सवाल था, पर देखिये इश्वर भी कैअसम न्याय करते हैं पीर बाबा को भी भगा दिए और पीर के चेले को भी घर बैठा दिए.
चलिए फिर इंतजार करते हैं २८ क़ी.

शनिवार, 23 जुलाई 2011

चित्र प्रदर्शनी में चित्रकला विभाग एम्.एम्.एच.कालेज गाजियाबाद के पूर्व विद्यार्थी मनोज कुमार बालियान

ललित कला अकादमी की गैलरी -२ (दो) में २७ जुलाई २०११ से आयोजित हो रही चित्र प्रदर्शनी में चित्रकला विभाग एम्.एम्.एच.कालेज गाजियाबाद के पूर्व विद्यार्थी मनोज कुमार बालियान भी इस ग्रुप में शरीक हैं . देखें पोस्टर